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Sassi

Product Description

चाय बागानों के ढलान से उतरकर महीन खुशबू सी नौ बरस की सस्सी, जब हर रोज़ महंती बाबू से मिलती तो उनकी दी हुई चमकीली पन्नी में लिपटी लॉलीपॉप पाकर बेहद ख़ुश हो जाती। लेकिन रिवायत की शर्त के चलते उसे दार्जिलिंग से दूर हॉस्टल जाना पड़ा और इस ख़बर ने महंती बाबू को वहाँ भेज दिया जहाँ से कोई लौटकर नहीं आता। सस्सी ने उनकी याद को दिल के किसी अनजान कोने में द़फ्ना दिया। नतीजतन, उनकी शक्ल ज़ेहन में कहीं खो गई जिसे वह तमाम उम्र तस्वीरों में उकेरने की कोशिश करती रही। उम्र जवाँ हुई तो तक़दीर ने भी अंगड़ाई ली, सस्सी ने खुद को सिक्किम की बाहों में पाया। जहाँ एक फौजी अ़फसर उसकी ज़िन्दगी में शामिल तो हुआ लेकिन त़कदीर का हिस्सा न बन सका। सस्सी ने सिक्किम से दामन छुड़ाया तो दिल्ली ने हाथ पकड़ लिया। हँसता-खेलता राज उसकी ज़िन्दगी में बतौर फ्लैटमेट दा़िखल हुआ। जो एक मजबूरी का नतीजा था, और साथ ही एक ऐसा अजीबो-गरीब इत्ति़फा़क जिसकी कड़ियाँ तारी़ख में 1965 के एक नाकाम फौजी मिशन से जुडी थीं।

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About the Author

राजवीर, अपना एक पाँव साहित्य की दुनिया में रखते हैं, तो दूसरा कॉर्पोरेट जगत में। मौजूदा व़क्त में उनका ठिकाना मुम्बई है, जिसे वह बम्बई जानकर जी रहे हैं। बम्बई तक पहुँचने के लिये उन्होंने सबसे पहले ग्वालियर के नज़दीक एक गाँव कठमा में एक कुम्हार परिवार में जन्म लिया और स्कूल में बैठने की उम्र तक आते-आते रतलाम पहुँच गए थे। रतलाम में स्कूल ख़त्म हुआ तो अगला पड़ाव ग्रेजुएशन के नाम पर इंदौर में पड़ा, जहाँ से नौकरी का धक्का पाकर पहले तो भुबनेश्वर और फिर सीधा पूना शहर जा पहुँचे। पूना में जमना शुरू ही किया था कि उखड़ गए और जनाब जा पहुँचे अपनी मंज़िल, बम्बई। इस स़फर के दौरान बहुत कुछ बदला, लेकिन जो एक बात नहीं बदली, वह थी हिंदी साहित्य के लिए प्रेम और लगन; यह किताब उसी प्रेम और लगन का एक ठोस सबूत है।

 

  • Paperback: 200 pages
  • Publisher: Redgrab Books; First edition (5 January 2019)
  • Language: Hindi
  • ISBN-13: 978-9387390607