HindiMythologyNovel

Shiv

  • Paperback: 240 pages
  • Publisher: Redgrab Books & Anybook; First edition (5 January 2019)
  • Language: Hindi
  • ISBN-13: 978-9387390591

Product Description

अनुकूलता सुख देती है और प्रतिकूलता दुख। एक ही वस्तु किसी को सुख देती है और किसी को दुख, किन्तु सुन्दरता वस्तु-निष्ठ है। जो कल्याणकारी है, वही सुन्दर है। वह किसी के दुख का कारण नहीं हो सकती यद्यपि वह कष्ट-साध्य हो सकती है। तप, कष्ट-साध्य है किन्तु कल्याणकारी है अत: सुन्दर है। शिवत्व का अर्थ है, प्रगति या कल्याण। अशिक्षा से शिक्षा की ओर, दरिद्रता से समृद्धि की ओर, निस्तेज से तेजस्विता की ओर प्रगति है। यह शिव है और सुन्दर है। ईश्वरत्व को साकार करने के प्रयास में भारतीय मनीषा ने शिव की अवधारणा प्रस्तुत की। यह पराभौतिक ज्ञान की ओर बढ़ने का एक प्रयास था। यह कहती है, शिव का हेतु ही सत्य है। शिवत्व ,सत्य की ओर ले चलता है। यत सत्यं तत् शिवम, यत शिवम तत् सुन्दरम्। शिव सदैव सुखद रूप से शीतल है, शान्त है, सुन्दर है और पवित्र है।

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About the Author

सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया से सेवानिवृत्त डॉ. अशोक शर्मा ऐतिहासिक और पौराणिक चरित्रों को केन्द्र में रखकर उपन्यास लिखेने के लिये जाने जाते हैं। आपके पूर्व प्रकाशित तीन उपन्यास ‘सीता सोचती थीं’, ‘सीता के जाने के बाद राम’ और ‘कृष्ण : अन्तिम दिनों में’ अपनी प्रस्तुति, तथ्य-परक दृष्टि एवं पात्र-गठन की विशेषता के कारण जाने जाते हैं। इनमें वे मुख्य पात्र के साथ-साथ आन्य पात्रों के साथ भी समुचित न्याय करने में सफल रहे हैं।