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The struggle of my life

Product description

हमें, ज़िन्दगी के लगभग हर पल, समय के विरुद्ध एक तरह की लड़ाई लड़नी पड़ती है, इस लड़ाई को किसी भी कीमत पर जीतने के लिए हम अपनी सम्पूर्ण क्षमताओं के साथ इस तथाकथित ‘युद्ध’ में भाग लेते हैं। इस मुठभेड़ की विडम्बना यह है कि हम अच्छी तरह से जानते हैं कि इस युद्ध को हम हार जायेंगे, फिर भी हम लड़ते हैं, हम अंत तक लड़ते हैं, क्यों? क्योंकि यही वो क्षण होता है जब हम अपनी समस्त बौद्धिक क्षमताओं को भूलकर अपने दिल को अनुमति देते हैं कि वह हमारी पूरी दुनिया पर शासन करे। हम उम्मीद विश्वास रखते हैं उस आखिरी ‘टॉस’ में, जो परिणाम को बदल सकता है। हमारे मन, हृदय और आत्मा को उस ‘अज्ञात’ पर वो एक अंतिम विश्वास होता है और भीतर से आवाज़ आती है़ जो चीख-चीख कर हमसे कहती है, ‘शायद अब शायद अब शायद अब हम यह लड़ाई जीत जायेंगे।’
यह उपन्यास एक “संघर्ष त्रिकोण” के बारे में है; जहाँ एक युवा सौभाग्यवश या दुर्भाग्यवश ऐसी स्थिति पर पहुँचता है जहाँ उसे प्यार, करियर और सपने में से किसी एक को चुनना पड़ता है। यह पुस्तक सिर्फ एक उपन्यास नहीं है, बल्कि राजनीति की अनचाही बाधाओं और समाज के तथाकथित दोहरे मापदंडों से सजी एक भावुक यात्रा है। जिसमें कथा खुद ऐसे मुकाम पर पहुँचती है जहाँ ये तय कर पाना मुश्किल है कि इस पूरे सफर में अहम किरदारों ने क्या पाया और क्या खोया।

मायूस सदायें भी संभालेंगी गिरते मकाँ को,
ये ज़िम्मेवारी सिर्फ दीवारों की नहीं होगी
कुछ तो वजूद होगा पढ़ने वालों का भी
ये कहानी सिर्फ किरदारों की नहीं होगी।

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About the Author

सचिन चौहान उर्फ क्षेम प्रताप, एक सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं, जो अमेरिका की प्रतिष्ठित एमएनसी के साथ काम करते हैं। सचिन का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर चन्दौसी में हुआ और इनकी प्राथमिक शिक्षा भी यहीं से सम्पन्न हुई। पढ़ने और लिखने के अलावा, भारतीय पौराणिक कथाओं और अध्यात्म में इनकी गहरी रुचि है। देर रात, मौन की चादर ओढ़े, खुले आसमान के नीचे बैठकर वो अक्सर ‘विज्ञान और अध्यात्म’ पर मनन करते हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर फुटबॉल खेलना इन्हें खूब पसंद है, आप ‘रॉक म्यू़िजक’ के शौकीन हैं और स्थानीय बैंड्स के लिए गीत भी लिखते हैं।