HindiMythologyNovel

Ram (Ram-Ravan katha)

  • Paperback: 400 pages
  • Publisher: Redgrab Books & Anybook; first edition (15 January 2019)
  • Language: Hindi
  • ISBN-13: 978-9387390584

Product Description

रामकथा को अलौकिकता के दायरे से निकालकर, मानवीय क्षमताओं के स्तर पर परखने की शृंखला का नाम है ‘राम-रावण कथा’। इसकी विशेषता ही यह है कि इसमें राम नायक अवश्य हैं किंतु रावण भी खलनायक नहीं है। कथा का दूसरा खंड ‘दशानन’ रावण पर केंद्रित था, इसलिए क्योंकि कथा कालक्रमानुसार प्रगति कर रही है और रावण के चरमोत्कर्ष का काल राम के कर्मक्षेत्र में उतरने से पूर्व का है। इस तीसरे खंड ‘राम: सप्तम विष्णु का अभ्युदय’ में पूरी कथा में राम ही राम हैं। यह उनके विष्णु के अवतार के रूप में प्रतिष्ठित होने की कथा है। इस प्रतिष्ठा को सार्थक करने के उनके प्रयासों की कथा है। इस खंड की कथा राम के विश्वामित्र के साथ ताड़का-वध हेतु प्रस्थान से आरम्भ होकर उनके दण्डक-वन में प्रवेश तक की गाथा है। दूसरे शब्दों में वनगमन से पुनः वनगमन तक की कथा है। किस प्रकार राज्याभिषेक की देहरी तक पहुँचकर भी उन्होंने सहर्ष राज्य का मोह त्यागकर वनगमन स्वीकार किया, यही इस कथा का केन्द्रबिन्दु है। राम के वनवास की कथा हो और कैकेयी का उल्लेख न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है। किंतु इस कथा की कैकेयी से आप घृणा नहीं करेंगे, उससे भी आप प्यार करेंगे, उसका सम्मान करेंगे। इस सबके बीच अनेक बिन्दु आपकी चेतना को झकझोरेंगे भी कि अरे, यह तथ्य तो हमें भी ज्ञात है पर इससे पहले इसे इस दृष्टिकोण से क्यों नहीं देखा|

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About the Author

Sulabh Agnihotri has multi dimensional talent in the field of literature. He is well known Hindi poet, enriching all the branches of Hindi poetry. He is an essay writer, a story writer, a play writer, he also writes for children, he is an editor and now he is a novelist too. In prose he is known for his straight forward approach. His editorials don’t give you a feeling that you are reading something, you feel as if he is directly talking to you. In the field of novel even this is his first attempt, it is appreciated everywhere. He has tried to find the route of each and every little or well known character of the Ramayan in this book. Every character has got proper space – no one is obliged, no one is neglected as well. He is totally unprejudiced while giving shape to his characters. About his writing he often says, that ‘I am not the creator, I am only a medium. I can’t prepare a synopsis and go ahead according to it, instead I simply sit with a pen and a paper and the words come of their own.’